M.S VERMA
MANOJ KUMAR
सुगंध दशमी पर जैन मंदिरों में गूंजे भक्ति के स्वरमहिलाओं ने रखा व्रत, शीतलनाथ भगवान की विशेष पूजा कर धूप अर्पित की
जसवंतनगर, संवाददाता। दशलक्षण महापर्व के अंतर्गत सोमवार को नगर के श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर एवं लुधपुरा जैन मंदिर में सुगंध दशमी का पर्व श्रद्धा और धार्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। महिलाओं ने व्रत-उपवास रखकर विशेष आराधना की।
कार्यक्रम की शुरुआत जिनेंद्र भगवान के अभिषेक एवं शांतिधारा से हुई। दशलक्षण विधान के दौरान सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य राजकमल चिराग जैन परिवार को प्राप्त हुआ। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजन कर भगवान से सुख-शांति एवं आत्मकल्याण की कामना की।
इस अवसर पर मुनि श्री 108 भाव सागर जी महाराज ने उत्तम संयम धर्म पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पंच इंद्रियों के साथ मन को नियंत्रित करना ही वास्तविक संयम है। उन्होंने कहा कि केवल बाहरी इंद्रियों पर नियंत्रण करना पर्याप्त नहीं, बल्कि मन, वाणी और व्यवहार को भी संयमित रखना आवश्यक है।
मुनि श्री ने कहा कि जैन धर्म में संयम, अहिंसा और करुणा का विशेष महत्व है। प्रत्येक जीव के प्रति दया का भाव रखते हुए जीवन में छोटी-छोटी सावधानियां अपनाना भी धर्म का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने श्रद्धालुओं से धर्म को केवल पूजा-पाठ तक सीमित न रखकर अपने आचरण और व्यवहार में उतारने का आह्वान किया।
दोपहर में शीतलनाथ भगवान की विशेष पूजा-अर्चना की गई। श्रद्धालुओं ने हवन कुंड में सुगंधित धूप अर्पित कर आठ कर्मों के क्षय और मोक्ष की कामना की। पूरे दिन मंदिर परिसर में भक्ति, आराधना और आध्यात्मिक वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने मुनि श्री भाव सागर जी महाराज के मंगल प्रवचन सुनकर धर्मलाभ लिया।
फोटो कैप्शन: सुगंध दशमी पर जैन मंदिर में पूजा-अर्चना करते श्रद्धालु।
