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बाल श्रम उन्मूलन पर कार्यशाला आयोजित,फर्रुखाबाद के नवाबगंज में समिति की बैठक, 2027 तक बाल श्रम मुक्त का लक्ष्य

बाल श्रम उन्मूलन पर कार्यशाला आयोजित,फर्रुखाबाद के नवाबगंज में समिति की बैठक, 2027 तक बाल श्रम मुक्त का लक्ष्य

रेहान ख़ान ब्यूरो चीफ फर्रुखाबाद 9452755077
फर्रुखाबाद के नवाबगंज स्थित विकास खंड सभागार में बाल श्रम उन्मूलन और बाल श्रम मुक्त उत्तर प्रदेश विषय पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला मुख्य विकास अधिकारी के निर्देश पर खंड विकास अधिकारी अमरेश सिंह चौहान की अध्यक्षता में हुई, जिसमें आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और ब्लॉक बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति के सदस्यों ने भाग लिया।
कार्यशाला में एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन के चाइल्ड राइट्स एसोसिएट जीशान अंसारी ने बाल श्रम से संबंधित कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किसी भी बच्चे से बाल श्रम कराना एक गंभीर अपराध है। दोषी नियोक्ता को 20,000 से 50,000 रुपये तक का जुर्माना या 6 माह से 2 वर्ष तक का कारावास हो सकता है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2027 तक राज्य को बाल श्रम मुक्त बनाने का संकल्प लिया है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर काम करने वाले और स्कूल से बाहर रहने वाले बच्चों की पहचान कर उन्हें स्कूलों में प्रवेश दिलाया जाएगा।
पंचायत सहायक और आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों से अपेक्षा की गई है कि वे ग्राम स्तर पर ऐसे बच्चों की पहचान कर श्रम विभाग को सूचित करें। ग्राम बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति के माध्यम से प्रस्ताव तैयार कर ग्राम पंचायत को बाल श्रम मुक्त घोषित किया जाएगा। अनुमोदन के बाद समिति एक वर्ष तक इसकी निगरानी करेगी।
बाल श्रम से संबंधित शिकायतें श्रम विभाग या केंद्र सरकार के http://pencil.gov.in पोर्टल पर दर्ज कराई जा सकती हैं। यह पोर्टल बाल श्रम की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
परिवीक्षा अधिकारी गिरजा ने इस दौरान साइबर अपराध से बचाव, मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना और मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना जैसी महत्वपूर्ण सरकारी योजनाओं के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने अभिभावकों से छोटे बच्चों को अकेला न छोड़ने की अपील की। चाइल्ड हेल्पलाइन काउंसलर ज्योति ने टोल फ्री नंबर 1098 के उपयोग के बारे में बताया। सहायक श्रमायुक्त नम्रता सिंह के निर्देशन में बीओसीडब्ल्यू और पीएमएसवाईएम जैसी श्रमिक योजनाओं की जानकारी भी दी गई।
खंड विकास अधिकारी अमरेश सिंह चौहान ने अपने संबोधन में कहा कि बाल श्रम को रोकने के लिए सभी का सहयोग आवश्यक है। उन्होंने ड्रॉप आउट बच्चों की पहचान कर उन्हें शिक्षा और श्रम विभाग की विभिन्न योजनाओं से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों की सुरक्षा की पहली जिम्मेदारी अभिभावकों की है।
इस अवसर पर बाल विकास परियोजना अधिकारी, चिकित्सा अधिकारी, जिला बाल संरक्षण इकाई से प्रवीण गुप्ता और अखिलेश सहित कई अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
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