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इटावा/जसवंतनगर: दशलक्षण पर्व के समापन पर भक्तिभाव में डूबा जैन मंदिर, विविध धाराओं से हुआ श्रीजी का अभिषेक

 M.S VERMA 

MANOJ KUMAR 

दशलक्षण पर्व के समापन पर भक्तिभाव में डूबा जैन मंदिर, विविध धाराओं से हुआ श्रीजी का अभिषेक

जसवंतनगर। दशलक्षण पर्व के दस दिवसीय आयोजन के समापन के बाद रविवार को आश्विन कृष्ण पक्ष प्रतिपदा पर श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में पारंपरिक जलधारा कार्यक्रम श्रद्धा एवं भक्ति के साथ आयोजित किया गया। कार्यक्रम मुनि श्री 108 भाव सागर महाराज के सानिध्य में संपन्न हुआ।

मंत्रोच्चार और धार्मिक विधि-विधान के बीच श्रद्धालुओं ने श्रीजी का जलधारा, इक्षुरस, घृत, दूध, दही एवं सर्वौषधि धारा से अभिषेक किया। अभिषेक एवं शांतिधारा के पुण्यार्जक समकित जैन रहे। वहीं चार इंद्र के रूप में अनुभव जैन, सुनील जैन, अनुपम जैन और विनीत जैन ने पुण्यार्जन किया।
मुनि श्री 108 भाव सागर महाराज ने भगवान आदिनाथ के जीवन प्रसंगों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भगवान आदिनाथ ने समाज को हंसी-मसि, कृषि सहित अनेक कलाओं एवं जीवनोपयोगी विद्याओं का ज्ञान दिया। उन्होंने अपनी पुत्रियों ब्राह्मी और सुंदरी को भी विभिन्न विद्याओं में पारंगत किया। भगवान आदिनाथ ने समाज को ज्ञान, संस्कार और जीवन जीने की कला का मार्ग दिखाया।

कार्यक्रम में क्षेत्राधिकारी आयुषी सिंह भी मंदिर पहुंचीं। जैन समाज की महिलाओं ने उनका स्वागत किया। मुनि श्री का आशीर्वाद लेने के बाद सीओ ने श्रद्धालुओं को सुरक्षा के प्रति जागरूक किया। उन्होंने कहा कि वाहन चलाते समय रफ्तार के साथ जीवन से जुड़े फैसलों में भी सावधानी जरूरी है। जल्दबाजी में लिया गया कोई निर्णय नुकसानदायक हो सकता है। पुलिस हर समय लोगों की सहायता और सुरक्षा के लिए तत्पर है।

कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा और श्रद्धालुओं ने धार्मिक अनुष्ठानों में उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

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